
Tuesday, January 19, 2010
भारत सोने की चिड़िया या हाथी

गर्भाधान ऋतुकाल की आठवी रात

उत्तर : इस विषय में आयुर्वेद में लिखा है कि गर्भाधान ऋतुकाल की आठवीं, दसवी और बारहवीं रात्रि को ही किया जाना चाहिए। जिस दिन मासिक ऋतुस्राव शुरू हो उस दिन व रात को प्रथम मानकर गिनती करना चाहिए। छठी, आठवीं आदि सम रात्रियाँ पुत्र उत्पत्ति के लिए और सातवीं, नौवीं आदि विषम रात्रियाँ पुत्री की उत्पत्ति के लिए होती हैं। इस संबंध में ध्यान रखें कि इन रात्रियों के समय शुक्ल पक्ष यानी चांदनी रात वाला पखवाड़ा भी हो, यह अनिवार्य है, यानी कृष्ण पक्ष की रातें हों।
प्रश्न : सहवास से विवृत्त होते ही पत्नी को तुरंत उठ जाना चाहिए या नहीं? उत्तर : सहवास से निवृत्त होते ही पत्नी को दाहिनी करवट से 10-15 मिनट लेटे रहना चाहिए, एमदम से नहीं उठना चाहिए। पर्याप्त विश्राम कर शरीर की उष्णता सामान्य होने के बाद कुनकुने गर्म पानी से अंगों को शुद्ध कर लें या चाहें तो स्नान भी कर सकते हैं, इसके बाद पति-पत्नी को कुनकुना मीठा दूध पीना चाहिए।
प्रश्न : संतान में सदृश्यता होने का क्या कारण होता है ?
उत्तर : संतान की रूप रेखा परिवार के किसी सदस्य से मिलती-जुलती होती है, यह कारण वंशानुगत होता है। माता-पिता के क्रोमोसोम्स में जो जेनेटिक तत्व होते हैं, वे वंशानुगत होते हैं और इनका प्रभाव बच्चे की शारीरिक रचना पर पड़ता है।
प्रश्न : परिवार नियोजन के लिए पुरुष और स्त्री में से किसका ऑपरेशन करना निरापद और उपयोगी होता है ?
उत्तर : पुरुष का ऑपरेशन निरापद भी होता है और स्त्री के ऑपरेशन के मुकाबले में आसान भी, क्योंकि पुरुष की शुक्राणुवाहिनी नलिकाएँ जो कि स्क्रोट्रम यानी अंडकोष में होती हैं, बहुत ऊपरी भाग में होती हैं अतः उस अंग को सुन्न कर के जरा सी देर में नलिकाओं को काटकर अवरुद्ध कर दिया जाता है। पुरुष चाहे तो मजे से अखबार पढ़ता रहे और ऑपरेशन होता रहे। स्त्रियों के मामले में दूसरी बात है, उनकी नलिकाएँ पेट के अंदर होती हैं, जिन्हें अवरुद्ध करने या काटने के लिए पेट को खोलना पड़ता है। यह मेजर ऑपरेशन होता है, इसमें किसी भी प्रकार के इंफेक्शन होने के चांस ज्यादा रहते हैं, इसलिए पुरुष का ऑपरेशन कराना ज्यादा आसान होता है, इससे उसके पौरुषबल पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।
प्रश्न : महिला का गर्भाशय ऑपरेशन से निकाल देना कब जरूरी होता है, क्या इसका कोई दुष्परिणाम भी होता है ?
उत्तर : यदि गर्भाशय में कोई ऐसी बीमारी हो जाए जो बिना ऑपरेशन के ठीक न हो, कोई गाँठ हो जाए, जो दवा से ठीक न हो, जाँच रिपोर्ट में कैंसर होने के लक्षण पाए जाएँ, किसी कारण से रक्तस्राव होता हो और बंद न होता हो तो ऑपरेशन करना जरूरी हो जाता है। डॉक्टर की कोशिश यही रहती है कि ऑपरेशन की नौबत ही न आए पर आ ही जाए तो इसके अलावा कोई चारा नहीं रहता है।
नकली दिमाग देगा आप को आराम

भेजा फ्राई हो जाए तो फिकर नॉट... अपने ब्रेन को आराम दीजिए और नकली दिमाग से काम लीजिए! शायद ये आ असली दिमाग से ज्यादा स्मार्ट हो। साइंटिस्टों का तो यही दावा है। स्विस साइंटिस्टों की एक टीम आर्टिफिशल माइंड बनाने में जुटी है और उनका दावा है कि अगले आठ साल में यानी 2018 तक वे नकली दिमाग तैयार कर लेंगे। इस टीम के लीडर प्रोफेसर हेनरी मारक्रम का दावा है कि यह दुनिया का पहला नकली इंटेलिजेंट और एक्टिव माइंड होगा। ब्रिटिश अखबार 'डेली मेल' में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, इसे सोने, कॉपर और सिलिकन से बनाया जा रहा है।
लॉन स्थित इकोल पॉलिटेक्नीक के ब्रेन माइंड इंस्टिट्यूट में प्रोफेसर मारक्रम के मुताबिक, नकली दिमाग के जरिए पागलपन पर फतह हासिल की जा सकेगी, इंसानी समझ और सीखने की ताकत को बढ़ाया जा सकेगा। मारक्रम का यह ब्लू ब्रेन दिमाग की कंप्यूटराइज्ड कॉपी तैयार करेगा। इसकी शुरुआत चूहे के दिमाग से की जा रही है और धीरे-धीरे इंसानी दिमाग की कॉपी कर नकली दिमाग तैयार होगा। वैज्ञानिकों का कहना है कि कंप्यूटर के जरिए तैयार किया गया यह दिमाग सोच सकेगा, तर्क कर सकेगा, अपनी इच्छा जाहिर कर सकेगा। और तो और, प्यार, गुस्सा, दर्द, दुख और खुशी जैसी भावनाओं को महसूस भी कर सकेगा। मारक्रम कहते हैं कि 2018 तक हमें इसे तैयार करने में कामयाबी मिल जाएगी। इसके लिए बहुत पैसे की जरूरत होगी, जो हमें अभी से मिलने लगा है। दुनिया के कई साइंटिस्ट अपने रिसोर्स लेकर मेरे साथ इस काम में जुट गए हैं।
Thursday, January 7, 2010
शादी पूरी फिल्मी है
शादी जिसकी चाह हर किसी को होती है। अगर यह समय पर हो तो इसका एक अलग ही मजा होता है । जैसे ही किसी युवा के विवाह की बात होती है तो वो अंदर ही अंदर कई सपने सजो लेता है और ख्वाबों की दुनिया में हिलोरे मारने लगता है। ये सब उसके अंतरमन में होता है । जिसको वो प्रदशिZत नहीं होने देता है। जिसके पश्चात वो उपरी तौर पर विवाह करने से मना करने लगता है। वह दिखाना चाहता है कि उसके लिए शादी कोई मायने नहीं रखती है। अगर कोइZ युवा शिक्षा ग्रहण कर रहा है तो विवाह से उस में होने वाली बाधाओं की दुहाई देने लगता है और वो नौकरी कर रहा है तो अच्छी आय प्राप्त करने की दुहाई दे कर शादी करने से मना करने लगता है। घर वालों के काफी प्रयास के बाद वो मान जाता है वह जिस भी परिस्थिति में होता है विवाह करने के लिए तैयार हो जाता है । लेकिन युवाओं की बात यही पर खत्म नहीं होती शुरू में विवाह का विरोध करने वाले ज्यादेतर युवा विवाह के बाद अपने घर वालों को भूल कर पत्नी व उसके घर वालों की वाली करने लगते हैं। ऐसा उन लोगों के साथ होता है जिनके लिए शादियों की कमी नहीं होती। क्या आप ने सोचा है जिनकी शादियां नहीं होती है उनको शादी के लिए क्या -क्या पापड़ बेलने पड़ते हैं। ज्यादे ना सोचिए इसका एक उदाहरण मैं आप को बताता हूं जिसके चपेट में आया ग्रेटर नोएडा का तुस्या गांव । जहां शादी को खेल का रूप देकर पूरी तरह से फिल्मी बना दिया गया और दोनो पक्ष को जबरदस्त बेवकूफ बनना पडा । हुआ यू एक पक्ष (बसंत राम) काल्पनिक नाम निवासी तुस्यान के लड़के की शादी नहीं हो रही थी और दूसरे पक्ष (रामधनी) काल्पनिक नाम निवासी ग्राम पूठी जिला मेरठ के भतीजे की भी वही दशा थी जो की पहले पक्ष की। दूसरे पक्ष ने अपने लड़के की शादी के लिए एक खेल रचाया। उसने पहले पक्ष यानी बसंत राम के लड़के की शादी अपनी लड़की से करने का प्रस्ताव इस शर्त पर रखा कि शादी होने के तीन दिन बाद बसंत राम अपनी लड़की की शादी राम धनी के भतीजे के साथ करेगा। दोनों पक्षों के लड़कों की शादी में दिक्तें आ रही थी लिहाजा दोनों ने शतZ मान लिया । शतZ के मुताबिक तुस्यान गांव के बसंत राम ने अपने लड़के की बारात ले कर रामधनी के घर पिछले माह में पहुंचे। वहां तो रामधनी ने विवाह के लिए एक अलग ही योजना बना रखी थी उसने अपनी लड़की की जगह एक कालगर्ल को कुछ पैसे दे कर बसंत राम के लड़के से शादी करने के लिए तैयार कर रखा था। हलांकी रामधनी के इस कृत का बसंत राम को भनक तक नहीं लग पाया और पूरे रीती रिवाज से उस कांल गर्ल के साथ बसंत के लड़के का विवाह संपन्न हो गया। बसंत ने बड़े ही उत्साह पूवZक के साथ अपनी बहु को अपने घर ले गऐ। बहु तो बहुत ही एडवांस थी उसके पास दो मोबाइZल फोन थे, अंग्रेजी वगैरह भी बोलती थी उसके कारनामों से बंसंत राम गर्वन्ति थें उनका लड़का भी ऐसी पत्नी पा कर बहुत खुश था। शर्त के मुताबिक वो तीसरा दिन भी आ गया जब राम धनी को अपने भतीजे की बारात ले कर बसंत राम के लड़की से विवाह करने के लिए आना था। बसंत राम ने भी अपनी लड़की के विवाह की तैयारी पूरी कर ली थी हुलुवाई वगैरह ने भी भोजन पूरे बारातियों के लिए तैयार भी कर लिया था। उसी दिन किसी काम के चलते बसंत राम की पत्नी अपने बहु के कमरे में गई तो उसने उसको किसी से फोन पर बातें करते सुना कि उसके शादी का कांट्रेक्ट पूरा होने वाला है जिसके उपरांत वो वापस आ कर अपने धंधे पर लग जाएगी। फिर क्या था पूरे घर व रिश्तेदारों में कोहराम मच गया की दुलहन चार दिन के कांट्रेक्ट पर आई है। बसंत राम व रिश्तेदारों द्वारा कड़ाई से पूछने पर उस कालगर्ल ने सारी सच्चाई बता दी कि उसे तीस हजार रुपयों में शादी में दुलहन की भूमिका निभाने का कांट्रेक्ट दिया गया था। जिसके तहत उसके दुलहन बनने का रोल कल समाप्त हो रहा है और वो कल चली जाएगी। बसंत राम ने भी जैसे को तैसे वाला फंडा अपनाया उन्होंने उसी कालगलZ को नया कांट्रेक्ट दिया कि फिर दुलहन बन कर उसको वही जाना है जहां से वो आई है और वो तैयार हो गई। शाम को रामधनी अपने भतीजे की बारात ले कर बसंत राम के घर आए बसंत राम ने भी उनका स्वागत सत्कार किया और घुघट की आड़ में उसी कालगलZ के साथ रामधनी के भतीजे का विवाह करा दिया। राम धनी बहुत खुश थे कि चलो भतीजे का विवाह गणित से हो गया। खुशी-खुशी भतीजे की दुलहन को ले कर रामधनी अपने घर पहुंचे और रीति रिवाज के तहत जब दुलहन का घुघट उठाया गया तो सबके होश उड़ गऐ ।घुंघट के पीछे वही कालगर्ल थी जिसे रामधनी ने अपनी बेटी बना बिदा किया था । वहां पर जैसे को तैसा वाली कहावत जबदZस्त चरित्रार्थZ हुई हलांकि किसी पक्ष द्वारा पुलिस में धोख धड़ी का रिपोर्ट नहीं लिखवाया गया था ।